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Thursday, December 19, 2013

पैगाम आखिरी

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ना आना कि 
तेरा इन्तजार आखिरी
ये जाम आखिरी 
ये शाम आखिरी
आखिरी है लड़ाई
आखिरी है मोहब्बत
सारी शिकायते 
गिले तमाम आखिरी
अब चैन की आरजू 
बस आखिरी आखिरी है
अब कहाँ लबों पे राम आखिरी है
बस तेरा नाम आखिरी है
चंद जिद्दी जज्बातो से दो चार हो जाऊँ
फिर
दौर ए वफा मुफलिसों को पैगाम आखिरी
तब तक
खिड़कियाँ खोल बैठो
जनाजे को चाहिये
तेरा सलाम आखिरी

2 comments:

  1. आखरी आखरी ... हर सबब आखरी ...
    उनकी सलाम को तरसते खुली आँखें भी आखरी ... लाजवाब ...

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