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Friday, May 17, 2013

सुना तुमने, राम

. . . . . . . . . . . . . ये बात और. . . कि तुमने दहेज नहीं ली. . . परन्तु स्वयंवर, लव मैरेज. . . छी छी. . भ्रम तोड़ लेना. . . कि अयोध्या वासी दीप जलायेगें. . . चलो किसी तरह समझा बुझा कर. . . इंट्री हो जायेगी. . मगर. . केकई का क्या करोगे. . . भरत ने तो पहले ही.. जमीन जायदाद पर.. दसरथ के अँगुठा लगा रखे हैं. . . और फिर सीता की फरमाईश. .. उफ्फ. . चलो किसी दुसरे शहर में. . रोजी रोटी की जुगाड़ करने. . . मगर लक्षमण साथ नहीं आने वाला. . . और हाँ. . जरा संभल के. . यहाँ दस सिर वाले एक रावण नहीं. . . बल्कि एक सिर वाले ही मगर हजारों मिलेगें. . . ऐसे में. . किसी हनुमान की आस मत रखना. . . जो भी हाथ बढ़ायेगें. . लूटकर ही जायेगें. . . तुम्हे अकेले ही लड़ना है. . . जीवन की जंग. . सुना तुमने राम. . . . . . एक बात और. . . तुम्हारे पड़ोस के. . हर घर में. . एक धोबी है. . जरा बच के. . .

3 comments:

  1. आज आपके और ब्लागों की पोस्ट्स भी पढ़ीं .
    सार्थक और परिपक्व लेखन बहुत अच्छा लगा - बधाई !

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  2. हार्दिक आभार आप दोनो का

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