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Thursday, November 22, 2012

हवा

हवा. . .
क्या तुम मेरा साथ दोगी!
अरमानों की डोर से बँधी
एक बड़ी सी
ख्वाबों की पतंग लाया हूँ
कल की गुप्तगू में
आज आने का वादा था
इसलिये
जब में अपने अरमानों को ढील दूँ
...
तुम मेरी पतंग को उपर ले जाना
मुझे मालूम है
वो वादा नहीं तोड़ेगा
चुपचाप पतंग पर बैठ
चाँद नीचे आयेगा
बोलो
तुम साथ दोगी ना!

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