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Tuesday, November 27, 2012

मोहब्बत_बेईमान बना देगी

हाँ
जीवन के उतार चढ़ाव में
कड़कती धूप
और
सुहानी छाँव में
शहर की भागदौड़
या
मेले वाली गाँव में
निरंतर

लगातार
मैं तुम्हार हाथ
थामें रखूँगा
मगर
रस्मों के बिसात पर
कुछ कसमों का टूटना तय है
देखना
एक दिन तुम्हें भी
मोहब्बत
बेईमान बना देगी

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