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Friday, November 30, 2012

गुनाह

यूँ तो
रिश्वत लेना और देना,
दोनों ही गुनाह है
मगर
मोहब्बत के मामले में
ये अपवाद है

Wednesday, November 28, 2012

क्रोध_तुम्हारी जरूरत नहीं

सुनो
अंदर आने से पहले
वहीं दरवाजे पर
खड़े खड़े
सुनो
कहाँ आये हो
ये रौबदार चेहरा लिये
क्या लगता है
मैं डर जाऊँगा
तुम्हारी लाल लाल आँखों से
और
और तुम्हारे हाथ की लाठी से
नहीं रे
देखो मेरी आँखों में
प्रतिशोध की ज्वाला
शांत हो चुकी है
चेहरे पर
प्रेम की परछाई
दिख रही होगी
. .
क्रोध
अब यहाँ
तुम्हारी जरूरत नहीं

जाओ ढूँढ़ लेना
कोई ठिकाना
जहाँ
प्रेम मर चुका होगा

बना लेना उसके अंदर घर
जिसकी आत्मा मर चूकी होगी

Tuesday, November 27, 2012

मोहब्बत_बेईमान बना देगी

हाँ
जीवन के उतार चढ़ाव में
कड़कती धूप
और
सुहानी छाँव में
शहर की भागदौड़
या
मेले वाली गाँव में
निरंतर

लगातार
मैं तुम्हार हाथ
थामें रखूँगा
मगर
रस्मों के बिसात पर
कुछ कसमों का टूटना तय है
देखना
एक दिन तुम्हें भी
मोहब्बत
बेईमान बना देगी

Monday, November 26, 2012

कविता फिल्म

 एक नई पहल

कविता की नई भाषा, shabd अब मौन नही

http://ssadharan.blogspot.in/p/kavita-films.html

दोहे

. . . . . . . . . . . . . . . .

जहाँ कहीं भी हो अगर, सुन्दरता की बात।
सीरत आगे हुश्न की, फीकी है औकात॥

अगर बुरा देखो कहीं, मुँह पे रखना हाथ।
लाठी लेकर सत्य के, रहना हरदम साथ॥

चाँदी सा मुखड़ा मिला, सोने सा व्यवहार। 
माया के संसार में, मत जाना तू हार॥


आदत सी अब हो चली, छोटे कपड़े यार।
फैशन में भूले सभी, तन की ईज्जत यार॥

आओ मिलकर सब करें, सीरत का गुणगान।
प्रेम मुहब्बत को तभी, मिल पाये सम्मान॥

Sunday, November 25, 2012

क्या तुम मुझे मिल सकती हो........मेरी ही तनहाई में


सुनो
हमारी मोहब्बत
एकदम साधारण सी है ना

तुम्हारे होंठ
बस तुमसा ही लगा
कहाँ किसी गुलाब में वो हँसी पायी

चेहरा
आदतन
जब चाँद दिखता है
तो तलाशने लगता हूँ
तेरा अक्स
पर कहाँ कभी चाँद तुमसा हो पाया है

वजह तो नहीं
पर तलाशने लगता हूँ
फिल्मों की नायिकाओं की
रूप रेखा नैन नक्श
रैपरों और पोस्टरों में छपी
मॉडलों में
पर कहाँ कोई तुमसा दिखा

नींद में
कभी पास आते आते
सपनों का टूट जाना
या फिर
यादों में
तस्वीर जब धूँधलेपन से उभरना चाहती हो
तो आँखों का भर आना

कहाँ
कहाँ कुछ भी
जहाँ तुम हो

डायरी के पन्नों में
खट्टी मीठी यादों को
कई बार समेट लेने की
नाकाम कोशिश
झलकते तो हैं
कुरकुरे का पैकेट
क्लास रूम की कुर्सीयाँ
दोस्तों के शोरगुल
टीचर्स की डाँटें
पर तुम कहाँ

लुकाछिपी का खेल खत्म करके
क्या तुम मुझे मिल सकती हो
मेरी ही तनहाई में
कभी पुरानी पीपल तले
कभी गाँव की पगडंडी में
कभी खिलखिलाते खेतों में
कभी रिमझिम बरसात में
या फिर अकेली रात में. . . . . . . . . .

Saturday, November 24, 2012

मुकाम कीजिये

मासूम हौंसलों को सलाम कीजिये
मोहब्बत के रास्ते में कुछ नाम कीजिये
सोचा बहुत ने नेकी के वास्ते यहाँ
धरातल पे मगर उनको मुकाम कीजिये

मोहब्बत सौदा नहीं

मोहब्बत में मोहब्बत की तलाश हो
सौदा नहीं कि जख्मों का हिसाब हो

Thursday, November 22, 2012

हवा

हवा. . .
क्या तुम मेरा साथ दोगी!
अरमानों की डोर से बँधी
एक बड़ी सी
ख्वाबों की पतंग लाया हूँ
कल की गुप्तगू में
आज आने का वादा था
इसलिये
जब में अपने अरमानों को ढील दूँ
...
तुम मेरी पतंग को उपर ले जाना
मुझे मालूम है
वो वादा नहीं तोड़ेगा
चुपचाप पतंग पर बैठ
चाँद नीचे आयेगा
बोलो
तुम साथ दोगी ना!

"साधारण" सी बात होनी चाहिये gazal

बात कुछ भी ना हो पर बात होनी चाहिये।
रोज ही इक दफा मुलाकात होनी चाहिये॥
दो इश्क साथ हो या फिर रकीबों की जंग हो।
दोनों की एक सी हालात होनी चाहिये॥
यूँ ना गलियों में होकर के बेनकाब चलो।
चाँद देखे कोई तो रात होनी चाहिये॥
जात मजहब का मुबारक खुदा तुमको लेकिन।
आदमी की भी कोई जात होनी चाहिये॥
जन्मोत्सव में दारू की बोतल ना तोड़िये।
खुशी में "साधारण" सी बात होनी चाहिये॥

'लवर'

जब कोई पुछता है
तुम मेरी कौन हो?
क्षणिक निःशब्द हो जाता हूँ
तीव्र गति से
कुछ चित्र
उभरने और मिटने की दौड़ में
जो वर्षों से अंकित
मेरे मानस पटल पर
हर्षोल्लास को नहीं खोने की कोशिश में
सरल आशामय
...
प्रेरक
जीवन तार को झँकृत करती हुई
मुझसे कहती
कि चुप ना रहो
और मैं
प्रेयसी
प्रियतमा
आदि कहकर बोझिल नहीं रह सकता
इसलिए
सीधे ही
अत्याधुनिक शब्दों में
कह देता हूँ
तुम मेरी 'लवर' हो

gazal


करती है लाखों प्यादे बहाल जिन्दगी।
चलती है मगर अपनी ही चाल जिन्दगी॥
अभी मौज मस्ती में खो गये हो तुम।
पुछेगा तुमसे एक दिन सवाल जिन्दगी॥
गैरों के गम में खुशियाँ तूभर दे अगर।
तुझको भी करेगा मालामाल जिन्दगी॥
जो झुठ और फरेब के तू साथ जाएगा।
बेशक तो होगी एक दिन बबाल जिन्दगी॥
वतन के वास्ते अगर तू काम आयेगा।
तो मौत के बाद भी है कमाल जिन्दगी॥


ना जाने किस शब्द से आहत होकर तुने चिट्ठी फाड़ दी
अँतिम लाईन पढ़ते तो मुस्कुरा दिये होते